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भारत की शान

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भारत तेरी शान की करते हैं गुणगान हम  आन बान और मर्यादा का करते हैं सम्मान हम दुनिया मैं है इसकी गणना  अन्याय असत्य से अंजाना  पावन निर्मल बहे सरिता कण कण में यहां मिले फरिश्ता सत्य वचन और धर्म का पाठ पढ़ाता है  भाईचारा स्नेह प्रेम से रहना सिखाता है चार वेद और चारों धाम करते हैं जो इसका नाम हिमालय उत्तर में गुंबज प्यारा लगता है हिंद सागर दक्षिण में कल कल कल कल करता है   पश्चिम में रेगिस्तान की आंधियां  पूर्व में कृष्णा की बनी बांधिया सब देशों का ये है हीरा  जहां पर कृष्णा की है मीरा ऐसा देश हमारा है  प्यारा देश हमारा है

आपकी लाडली

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झिलमिलाती रोशनी की गुहार हूं मैं रिमझिम बारिश की फुहार हूं मैं  पापा की परी मम्मी की सांस हूं  भैया की कलाई बहना की आस हूं अपकी अंखियों की हूं लाली  इस दामन की हूं प्याली सब कहते हैं पराई हूं फिर जाने क्यों दुख में नहाई हूं  मुझे भी भैया संग ऊंचाई नापने दो  इस दुनिया के सतरंगे किनारे जांचने दो   मेरा जोश उत्साह और बड़ावो ना  अब तो सम्मान मेरा भी करवाओ ना रूठ जाओगे तो मैं तुम्हें मनाऊंगी  बनके में चिड़िया एक दिन उड़ जाऊंगी   याद तुम सभी को मेरी आएगी  लाडली तुम्हारी खुशियां फिर भी लाएगी रंग बिरंगी रोशनी फिर से चमकेगी प्यारी सी तुलसी फिर से महकेगी

वायु का एहसास

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समीर प्राणवायु जिंदगी है  इसके बिना भी कहां बंदगी है सांस थमती नहीं जिंदगी चलती नहीं बिना इसके भी जीना कहां  अब तो रहना भी दुर्गम वहां एक क्षण के लिए जब थम जाए तू जीने के सारे पथ बंद हो जाए यू  दिल मचलने लगा सांस बढ़ने लगी  अब तो आने की आस घटने लगी दम सा घुटने लगा अब खेतों में यहां बम सा पड़ने लगा तब रेतो में तो वहां फिर सूनी समीर ने हमारी कहानी अब तो बहने लगी उसकी जुबानी एक प्यारी सी हवा का झोंका आया था हो गए सभी प्रफुल्लित ऐसा मौका आया था  समीर प्राणवायु जिंदगी है  इसके बिना भी कहां बंदगी है

ओ मोहन प्यारे

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ओ मोहन प्यारे चांदनी रात में राग हो तुम कान्हा दोपहरी धूप में छांव हो तुम कान्हा  भूखे के दिलों में आशा हो तुम  प्यासे के रगो में दिलासा हो तुम ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे  भटकते हुए के पंथ हो तुम  भूले बिसरे के मन में यादें हो तुम  ये कैसी डोर है ये कैसा छौर है ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे एक बात बताओ मेरे सांवरे  कब सुनोगे खता मेरे बावरे हर चौखट पर तेरा देवालय है बना  सब लोगों का हिमालय तू है घना  ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा  न्यारे उस अमीर के दिल में दया है तू उस गरीब के मन में नया है तू रग रग कण कण में तेरा रूप है पग पग क्षण क्षण में तेरा स्वरूप है  ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे  उस बंजर भूमि की हरियाली हो तुम  उस करुण क्रंदन की खुशहाली हो तुम सुनलो आरजू  मेरी चले आओ कान्हा खुशियों का नजारा दिखाओ कान्हा  ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे  उन आंखों की लाली में डूबे रहे  सूने दिलों के कोने में बैठे रहे दिल में उठती है ऐसी पीड़ा गिरिधर बिन बरसात के बारिश हुई मुरलीधर ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे

मां का वात्सल्य प्रेम

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मैं तेरी सांसों की हूं कल्पना  रब से करती हूं ये वंदना  मां तुझसे ही खिला खुशियों का चमन मां तेरे एहसासों का ये चैन अमन तेरी गोदी में झूला झुलू प्यारी दुनिया का मेला देखूं लालित्य प्रेम जो हम पर लुटाती है वात्सल्य ममता फिर से हंसाती है मां तुमसे ही जिंदगी में रौनक प्यारी  तेरे बिना सूनी लगे दुनिया सारी मां निर्मल प्यारी सी सूरत है  तेरे बिना कहां जग में कुदरत हैं  मां जैसी मूरत दुनिया में नहीं कोई दर्द सहे हजारों फिक्र नहीं कोई  तू ज्योति है मां  तू थाती है मां तू धैर्य की धीरता है मां  तू पावन सरिता है मां  मां तुझमें न्यारी सी सरलता है तुझमें मां प्यारी सी नम्रता है  दिल समंदर की गहराई जैसा है आपके एहसासों का बवंडर कैसा है  आपसे ही खुशियों की ओढ़नी बिछी  आपकी डांट लगे सबसे तीखी मेरी हरियाली तुम ही हो बसंत मेरे अरमानों की ऐसी हो उड़ंत ना दिखावा है तुझमें मां ना छलावा है तुझमें मां तुझसे बना है ये देह शक्तिशाली है  तुझसे ही मां हम प्रतिभाशाली हैं मेरी किस्मत की आप हो कमान  मेरी प्रयासों की हो ऐसी उड़ान  तुझसे ही ...