शायरी
तेरी बेबसी को हकीकत समझा हमने तेरी मुस्कुराहट को खुशी समझा हमने फिर ऐसा क्यों दर्द दिया तुमने दिल के हर कोने को छलनी किया तुमने बेइंतेहा तेरे दिल को चाहते हैं सबसे ज्यादा यह दिल्लगी तुमसे ना जीने देती है ना मरने देती है तेरी चाहत यह सिला देती है चलो आज जमाने की यह बात होगी आपसे हर रोज मुलाकात होगी ना तेरे दिल पर मरहम लगा रहे हैं ये तो संस्कार है हमारे जो हम निभा रहे हैं तुमने हमको समझा ही नहीं मेरी हकीकत क्या है फिर यू ही रिश्ता पल में तोड़ दिया ये कैसा प्रपंच है जो तुमने खोल दिया