मां का वात्सल्य प्रेम
मैं तेरी सांसों की हूं कल्पना
रब से करती हूं ये वंदना
मां तुझसे ही खिला खुशियों का चमन
मां तेरे एहसासों का ये चैन अमन
तेरी गोदी में झूला झुलू
प्यारी दुनिया का मेला देखूं
लालित्य प्रेम जो हम पर लुटाती है
वात्सल्य ममता फिर से हंसाती है
मां तुमसे ही जिंदगी में रौनक प्यारी
तेरे बिना सूनी लगे दुनिया सारी
मां निर्मल प्यारी सी सूरत है
तेरे बिना कहां जग में कुदरत हैं
मां जैसी मूरत दुनिया में नहीं कोई
दर्द सहे हजारों फिक्र नहीं कोई
तू ज्योति है मां
तू थाती है मां
तू धैर्य की धीरता है मां
तू पावन सरिता है मां
मां तुझमें न्यारी सी सरलता है
तुझमें मां प्यारी सी नम्रता है
दिल समंदर की गहराई जैसा है
आपके एहसासों का बवंडर कैसा है
आपसे ही खुशियों की ओढ़नी बिछी
आपकी डांट लगे सबसे तीखी
मेरी हरियाली तुम ही हो बसंत
मेरे अरमानों की ऐसी हो उड़ंत
ना दिखावा है तुझमें मां
ना छलावा है तुझमें मां
तुझसे बना है ये देह शक्तिशाली है
तुझसे ही मां हम प्रतिभाशाली हैं
मेरी किस्मत की आप हो कमान
मेरी प्रयासों की हो ऐसी उड़ान
तुझसे ही प्यारी ये मुस्कुराहट है
मेरी रंग बिरंगी जगमगाहट है
पहली शिक्षा मैंने जो तुझसे पाई है
मेरी प्रशंसा तुमने हीं करवाई है
मां तेरा हाथ सिर पर हो मिट जाए दुविधा
रूठ जाए अगर मां छूट जाए खुशियां
साकार रूप में फरिश्ता हो मां
प्यार भरी खिलखिलाहट की सरिता हो मां
फिर कैसा मां ये तनाव है
प्यारी सी तुलसी का ये पड़ाव है
मां तेरे प्रेम को कैसे बयान करूं
कैसे मां तेरी महिमा का बखान करूं--------मां मां !
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