माता-पिता का दुख
पेरेंट्स जो हमारी लाइफ के गॉड गिफ्ट है।कितना प्यारा एहसास है बच्चों के लिए उनकी खुशियां अधूरी छोड़ देते हैं।खुद मुश्किलों में रहकर बच्चों की खुशियां पूरी करते हैं।यहआसमा यह शमा पेरेंट्स के उपकारो की कितनी बातें कर ले फिर भी कम है। हम उनके कर्ज को कभी नहीं चुका सकते हैं।
वर्तमान समय में बच्चे माता-पिता को तुच्छ समझने लगे हैं।अगर माता-पिता उनकी सौ इच्छाओं को पूरी करदे और एक इच्छा पूरी नहीं करते तो बच्चों उनका अपमान कर देते हैं। जिनकी हर सांस हर धड़कन अपने बच्चों के लिए समर्पित कर देते हैं। यह बच्चे ही अक्सर उन्हें बहुत रुलाते हैं।
क्या तुमने कभी सोचा है कि बड़े होकर जब माता-पिता बनोगे तब क्या होगा। पानी के बिना जैसे फसल नहीं हो सकती उसी प्रकार माता-पिता से हीन बच्चे लाइफ में संस्कारवान और गुणवान नहीं बन सकते।
आज वर्तमान समय यह आ गया है कि बच्चे किशोरावस्था से पहले माता-पिता से बहुत प्यार करते हैं।जैसे ही किशोरावस्था की age आती हैं वैसे ही वह पैरंट्स से दूरियां बनाने लगते हैं। उनके साथ में प्यार भरी बातें नहीं करते, बल्कि अपने फ्रेंड्स के साथ enjoy या छोटी उम्र में ही गलत आदतों के शिकार हो जाते हैं।
जैसी रंगत आहिस्ता आहिस्ता आ ही जाती है। यह कैसी विवशता है, हर ख्वाहिश हर इच्छा पूरी करने वाले पेरेंट्स का उनको कोई खयाल नहीं रहता। पेरेंट्स फिर भी अपने बच्चों को नादान समझ कर हर गलती को माफ कर देते हैं।और वही बच्चे पेरेंट्स से एक भी गलती हो जाती है तो बहुत कुछ सुना देते हैं।
आपको पता भी है कि पेरेंट्स की भावना को कितना आघात होता है। कहते हैं कि पहला प्यार भुलाया नहीं जाता कैसी विडंबना है कि जब पैदा नहीं होते जबसे प्यार लुटाने वाले माता-पिता को अक्सर क्यों भूल जाते हैं ?
क्या माता-पिता का प्यार बच्चों को भावुक नहीं करता है ?अगर मन की भावनाओं का मंथन करके सोचे तो माता-पिता के बिना ही संसार अधूरा है।आजकल के बच्चों की कल्पना माता-पिता को अनदेखा व गहरी चकाचौंध भरी लाइफ के सपने सजाने में लगाते हैं क्यों पेरेंट्स का प्यार बच्चों को नहीं दिखता ? माता पिता के प्यार में कोई दिखावटीपन नहीं होता जैसे कड़वी नहीं होती हैं ,परंतु उसके शीतल घनी छाया कैसे प्यारी होती है।
वर्तमान समय में बच्चे माता-पिता को अक्सर बुढ़ापे में अकेले छोड़ देते हैं जब उन्हें किसी का साथ नहीं होता जब उनका शरीर बुढ़ापा का शिकार हो जाता है जब उन्हें बच्चों का साथ चाहिए तब उन्हें अकेले छोड़ देते हैं। अगर सरकार वृद्ध लोगों को पैसा मुहैया नहीं कराती तो वृद्ध लोगों क्या होता।
उनकी वजह से ही वे जीवन यापन कर रहे हैं। वे बच्चे जिन्हें अपनी जान से ज्यादा प्यार करते थे, जिनकी हर खुशी में साथ देते थे, यह बच्चे उन्हें बुढ़ापे में अकेले छोड़ देते हैं यह कैसा पाश्चात्य संस्कृति का कहर मचा है जहां भारतीय संस्कृति में प्राचीन समय से ही माता-पिता को ईश्वर की उपाधि से सम्मानित किया जाता था। वहीं आज बुढ़ापे में वृद्ध आश्रमों में छोड़ आते हैं। और खुद अकेले जीवन में आनंद लेते रहते हैं।
मैंने बहुत से वृद्ध लोगों को देखा है जिनके हाथ पैर चलने में लड़खड़ाते है, फिर भी वे काम करते हैं । और जिनकी आंखें धुंधली हो गई है वहीं आज चूल्हे पर रोटी बनाते हुए देखा है । But उन्हें गैस चलाना भी तो नहीं आता।
यह कैसी प्रॉब्लम है कि बच्चों को बुढ़ापे का सहारा मानकर उन्हें माता पिता उनकी सारी लाइफ का धन दौलत सब कुछ उनको दे देते हैं। फिर भी बच्चों उन्हें कुछ भी नहीं समझते है। एक बात और हैं अगर लाइफ में माता-पिता को बिना वजह रुलाया बच्चों ने तो उन्हें लाइफ की खुशियां नहीं मिल सकती।
एक दिन वे खुद माता पिता बनेंगे और उनके बच्चे उनके साथ ऐसा बर्ताव करेंगे तब उन्हें पता चलेगा कि माता-पिता क्या होते हैं। अक्सर किसी ने सही कहा है कि जो चीज हमारे पास होती हैं उसकी हमें कोई कदर नहीं होती और जो पास नहीं होती हम उन्हें खोजने में लगे रहते हैं ।
ऐसे ही जिन बच्चों के माता-पिता नहीं होते उन बच्चों को पता है कि वह कैसे जीवन जीते हैं उन्हें तो माता पिता का प्यार भी नहीं मिल पाता ,उनको जीवन में एहसास ही नहीं होता कि माता-पिता का दुलार ,असीम प्रेम क्या होता है? इस प्यार को पाने के लिए वे तरसते रहते हैं ।
इसलिए जिनके पास है कदर करें, आदर करें हर खुशी हर गम को माता-पिता के साथ बांटे क्योंकि लाइफ में सब कुछ मिल सकता है परंतु माता-पिता का प्यार कभी नहीं मिल सकता इसलिए उनको सम्मान सहित बुढ़ापे में उनका साथ रहकर उनको अपने साथ रखें। लाइफ में खुशियों की ओढ़नी फैल जाएगी। उनकी दुआ जिंदगी तुम्हारी बना देगी ।
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