ओ मोहन प्यारे
ओ मोहन प्यारेचांदनी रात में राग हो तुम कान्हा
दोपहरी धूप में छांव हो तुम कान्हा
भूखे के दिलों में आशा हो तुम
प्यासे के रगो में दिलासा हो तुम
ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे
भटकते हुए के पंथ हो तुम
भूले बिसरे के मन में यादें हो तुम
ये कैसी डोर है
ये कैसा छौर है
ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे
एक बात बताओ मेरे सांवरे
कब सुनोगे खता मेरे बावरे
हर चौखट पर तेरा देवालय है बना
सब लोगों का हिमालय तू है घना
ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे
उस अमीर के दिल में दया है तू
उस गरीब के मन में नया है तू
रग रग कण कण में तेरा रूप है
पग पग क्षण क्षण में तेरा स्वरूप है
ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे
उस बंजर भूमि की हरियाली हो तुम
उस करुण क्रंदन की खुशहाली हो तुम
सुनलो आरजू मेरी चले आओ कान्हा
खुशियों का नजारा दिखाओ कान्हा
ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे
उन आंखों की लाली में डूबे रहे
सूने दिलों के कोने में बैठे रहे
दिल में उठती है ऐसी पीड़ा गिरिधर
बिन बरसात के बारिश हुई मुरलीधर
ओ मोहन प्यारे ओ कृष्णा न्यारे
Very nice
जवाब देंहटाएं